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कृषि मंत्री तोमर ने कहा, नहीं खत्‍म होगी MSP, समझौता फसल का होगा जमीन का नहीं

Babita Pant

नई द‍िल्‍ली 10 Dec, 2020 06:39 pm

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने गुरुवार को कहा कि सरकार कृषि कानूनों (Farm Laws) को लेकर किसानों से बातचीत करने को तैयार है. एक प्रेसकॉन्‍फ्रेंस के दौरान उन्‍होंने एक बार फिर कहा कि संसद द्वारा सदन में पारित कानूनों से किसानों का ही फायदा होगा. इसी के साथ उन्‍होंने किसानों से अपील की कि वे एक बार प्रस्‍तावित संशोधनों को पढ़ लें जिन्‍हें सरकार कृषि कानूनों में शामिल करने पर विचार कर रही है और इस पर बातचीत करने के लिए तारीख तय कर दें. तोमर ने यह भी कहा, "सरकार बातचीत के लिए तैयार है."

तोमर ने कहा, "मैं किसान यूनियनों से अपील करता हूं कि वे बातचीत के लिए तारीख तय करें; हम उन्‍हें सुनने के लिए तैयार हैं."

कृषि मंत्री तोमर ने किसानों को इस बात का भी आश्‍वासन दिया कि नए कृषि कानूनों से APMC एक्‍ट या MSP पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.

उनके मुताबिक, "हमने किसानों को प्रस्‍ताव भेजा है लेकिन वे चाहते हैं कि हम कानून ही वापस ले लें. हम उनसे कह चुके हैं कि कानून के जिन प्रावधानों पर उन्‍हें आपत्ति है हम उन पर खुले दिमाग से विचार करने के लिए तैयार हैं. इन कानूनों से APMC या MSP प्रभावित नहीं होंगे. हमने ये बातें किसानों को समझाने की कोशिश की है."

केंद्र सरकार के पक्ष को एक बार फिर दोहराते हुए तोमर ने कहा कि इन कानूनों को इस उद्देश्‍य से पारित किया गया है ताकि किसान मंडी प्रणाली से मुक्‍त हो सकें और वे अपनी फसलों को बाजार से बाहर भी बेच सकें.

तोमर के मुताबिक, "इन कानूनों से एमएसपी का कोई लेना-देना नहीं है. इनसे एमएसपी पर जरा भी प्रभाव नहीं पड़ेगा. पीएम और मैंने किसानों को आश्‍वस्‍त किया है कि MSP जारी रहेगी."

किसानों की आशंकाओं को दूर करने की कोशिश करते हुए तोमर ने कहा, "ऐसा दिखाया जा रहा है जैसे कि किसानों की जमीनों को उद्योगपतियों द्वारा कब्‍जा लिया जाएगा. गुजरात, महाराष्‍ट्र, हरियाणा, पंजाब और कर्नाटक में बहुत पहले से ही अनुबंध पर खेती जा रही है, लेकिन वहां पर अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ."

उन्होंने कहा कि समझौता किसान की फसल का होगा. किसान की जमीन, पट्टा या लीज पर नहीं ली जा सकेगी और न ही इसका समझौता होगा. अगर फसल तैयार करने के दौरान कोई खेत पर कोई ढांचा बनाने की जरूरत पड़ी तो बाद में ये ढांचा हटाना पड़ेगा.

वहीं, प्रेस ब्रीफिंग में मौजूद पीयूष गोयल ने कहा, "मोदी सरकार देश के किसानों के प्रति समर्पित थी, है और रहेगी."

इसी के साथ पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि किसानों के लिए कोई अनिवार्यता नहीं है, उन्‍हें अपनी फसल बेचने का एक और विकल्‍प दिया गया है.

आपको बता दें कि इस साल सितंबर में पारित किए गए तीन नए कृषि कानूनों पर किसानों की आपत्तियों को दूर करने के लिए सरकार ने बुधवार को उन्‍हें प्रस्‍तावित संशोधनों का ड्राफ्ट भेजा है. हालांकि किसानों ने सरकार के प्रस्‍ताव को ठुकरा दिया है और वे कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं.

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